सूरत : गतिशील गुजरात की बड़ी-बड़ी बातों के बीच दिलदहलानेवाली एक हकीकत सामने आई है। जिसमें  एना गांव के एक परिवार को बीच रास्ते में मृतक का अंतिम संस्कार करना पड़ा था, क्योंकि श्मशान का किराया अचानक चौगुना बढ़ाया गया था। और बिना रुपयों के अंतिम विधि करने से इन्कार किया गया था। हालांकि परिजनों के पास इतने रुपए नहीं होने के कारण उन्हें बीच रास्ते में अंतिम विधि करनी पड़ी।

एना गांव हलपति समुदाय के अग्रणी तेजस राठोड ने इस बारेमें बताते हुए कहा कि, यहां के सोनी फलियां में रहनेवाले मोहनभाई राठोड की बीमारी के कारण मौत हो गई। जिसके चलते संबंधी व समुदाय के लोग इकठ्ठा हो गए। और गांव के श्मशान में उसके अंतिम संस्कार करने की तैयारियां शुरु की गई। 

लेकिन चाबी मांगे जाने पर उसे रखनेवाले ने बताया कि, संचालको द्वारा श्मशान का किराया 600 रुपए से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया गया है। और जब तक रुपये नहीं मिले चाबी देने के लिए मना किया गया है। उसकी इस बात को सुनकर परिजन समेत हलपति समुदाय के लोग आक्रोशित हो उठे।

बादमें सब श्मशान का संचालन करनेवाली कमिटी के प्रमुख के पास पहुंच गए। लेकिन उन्होंने यह निर्णय समिति के सभी सभ्यो का होने के कारण खुद बदलाव करने में असमर्थ है, बोलकर पल्ला झाड़ लिया। अब परिजनों के पास 2500 रुपये देने के अलावा कोई भी विकल्प नहीं बचा था। लेकिन वह रुपये देने में सक्षम नहीं होने के कारण उन्होंने बीच रास्ते में अंतिम विधि करने का निर्णय लिया। 

बतादे कि, आमतौर पे श्मशान में कोई किराया नहीं होता है। और अंतिम संस्कार के लिए आनेवाले लोग अपनी हैसियत के मुताबिक अनुदान करते है। ऐसेमें चौगुना किराया देने के बाद ही अंतिम विधि करने के श्मशान समिति के इस निर्णय को लेकर स्थानीय लोगों में गुस्सा भड़क उठा है। और तुरंत ही यह मनघडंत निर्णय रद्द करने की मांग लोग करने लगे है।