मेरान्यूज नेटवर्क.नई दिल्ली: राष्ट्रपति  रामनाथ कोविन्द और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित गवर्नर्स कांफ्रेंस में नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अमल और उच्च शिक्षा में परिवर्तन के सन्दर्भ में 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भूमिका' विषय पर मार्गदर्शन दिया। 

इस गवर्नर्स कांफ्रेंस में देशभर के राज्यों के राज्यपालों ने शामिल होकर अपने मंतव्य प्रस्तुत किए। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने इस अवसर पर कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में देश के युवाओं के सर्वांगीण विकास का चिंतन है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक के तमाम क्षेत्रों में बहुआयामी चिंतन द्वारा ज्ञान सम्पन्न भारत के निर्माण का पुरुषार्थ नयी शिक्षा नीति में किया गया है।

मातृभाषा में शिक्षा, पूर्व प्राथमिक शिक्षा स्तर से ही बालकों के सर्वांगीण विकास, विविधलक्ष्यी अध्ययन, मूल्यांकन के लिए गुणवत्ता और शिक्षक सज्जता जैसे अनेक सुधारों के कारण देश के युवा सांस्कृतिक मूल्यों के जतन के साथ ज्ञान- कौशल्य सम्पन्न बनेंगे और युवाओं को 'वैश्विक नागरिक' बनाने का संकल्प साकार होगा। 

इस गवर्नर्स कांफ्रेंस में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि नयी शिक्षा नीति कोई नीतिगत दस्तावेज नहीं है बल्कि नागरिकों- युवाओं की आकांक्षा पूर्ण करने का और भारत को शिक्षा क्षेत्र में 'वैश्विक केन्द्र' बनाने का भगीरथी प्रयास है। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन मूल्य आधारित आधुनिक शिक्षा पद्धति द्वारा ज्ञान सम्पन्न समाज के निर्माण का लक्ष्य नयी शिक्षा नीति में प्रतिबिम्बित हो रहा है। उन्होंने नयी शिक्षा नीति के अमलीकरण में राज्यों तथा राज्यपाल की भूमिका को महत्वपूर्ण बतलाया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नयी शिक्षा नीति 2020 को प्रासंगिक करार देते हुए कहा कि नयी शिक्षा नीति के निर्माण के समय दो लाख से ज्यादा लोगों के मंतव्य को ध्यान में लिया गया है। इसी प्रकार नीति के अमलीकरण के लिए भी लगातार विचार- विमर्श हो, यह आवश्यक है। शिक्षा नीति सरकार की ही नहीं वरन समग्र भारत की नीति है। श्री मोदी ने नयी शिक्षा नीति को 21 वीं सदी के भारत के सामाजिक- आर्थिक जीवन को नयी दिशा देने वाली और आत्मनिर्भर भारत के सामर्थ्य को साकार करने वाली बतलाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नयी शिक्षा नीति युवाओं को उनकी अपेक्षा के अनुसार ज्ञान-कौशल्य से लैस करने के लिए स्टडी के बजाए लर्निंग पर तथा क्रिटिकल थिंकिंग पर बल देती है। इसके साथ ही, प्रेक्टिकल और परफॉर्मेंस पर भी ध्यान देती है। 

कार्यक्रम के प्रारम्भ में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने नयी शिक्षा नीति 2020 के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। कांफ्रेंस में शामिल विभिन्न राज्यों के राज्यपालों और शिक्षा मंत्रियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

कांफ्रेंस के विशेष सत्र के दौरान नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा बनाने वाली समिति के अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन ने इस शिक्षा नीति का महत्व स्पष्ट किया। देशभर की महत्वपूर्ण युनिवर्सिटियों के कुलपतियों ने भी अपने विचार पेश किए। इसके अंतर्गत गुजरात की महाराजा सयाजीराव युनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. श्री परिमल व्यास ने भी अपने विचार प्रस्तुत करते हुए नयी शिक्षा नीति को आत्मनिर्भर भारत का ब्ल्युप्रिंट बतलाया। 

टेक्नीकल सत्र में युनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन के चेयरमेन प्रो. डीपी सिंह, अमेरिका की प्रिस्टन युनिवर्सिटी के प्रोफेसर और ड्राफ्ट कमेटी के सदस्य प्रो. मंजुल भार्गव तथा युजीसी के सदस्य श्री एनके. श्रीधर ने उच्च शिक्षा में परिवर्तन के सन्दर्भ में नयी शिक्षा नीति 2020 की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कांफ्रेंस के अंत में केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने सभी का आभार व्यक्त किया।