मेरान्यूज नेटवर्क.नई दिल्ली: नागर विमानन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अप्रैल, 2017 में शिमला से दिल्ली के लिए पहली उड़ान (यूडीएएन) सेवा को हरी झंडी दिखाने के बाद अभी तक 45 हवाई अड्डों और 3 हेलीपोर्ट्स को जोड़ने वाले 274 उड़ान रूट्स परिचालन में आ चुके हैं। आज उड़ान-आरसीएस योजना के अंतर्गत उत्तराखंड में पवन हंस द्वारा पहली हेलीकॉप्टर सेवा के शुभारम्भ के अवसर पर पुरी ने कहा कि हेली सेवा की शुरुआत और इन नए रूटों के खुलने से राज्य के लोग ज्यादा नजदीक आएंगे और क्षेत्र में पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा।

इस सेवा से देहरादून, नई टिहरी, श्रीनगर और गोचर के बीच संपर्क सुनिश्चित होगा। नई दिल्ली में वर्चुअली हरी झंडी दिखाने के अवसर पर एमओसीए सचिव प्रदीप सिंह खैरोला, एमओसीए संयुक्त सचिव ऊषा पाढे, पवन हंस लिमिटेड के सीएमडी संजीव राजदान उपस्थित रहे। उसी समय पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा रूट का शुभारम्भ किया गया। 

नई हेली सेवा की शुरुआत से उत्तराखंड में पहाड़ी क्षेत्रों के बीच हवाई संपर्क बढ़ेगा और औसत यात्रा समय घटकर 20-25 मिनट रह जाएगा। इससे चार धाम यात्रियों के लिए भी यात्रा आसान हो जाएगी। पवन हंस लिमिटेड इस रूट पर सप्ताह में तीन दिन हेलीकॉप्टर सेवा का परिचालन करेगी। आम लोगों के लिए किरायों को किफायती बनाए रखने के लिए उड़ान योजना के अंतर्गत परिचालक और यात्री दोनों ही वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) उपलब्ध कराई गई है। इस क्रम में, इस रूट के लिए किराया 2,900 रुपये प्रति सीट तय किया गया है। एमओसीए ने उड़ान 2 की निविदा प्रक्रिया के अंतर्गत देहरादून-नई टिहरी-श्रीनगर-गोचर रूट पवन हंस लिमिटेड को आवंटित किया गया है।

पवन हंस द्वारा जल्द ही देहरादून से पंतनगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और देहरादून से मसूरी को जोड़ने वाले दो अन्य नेटवर्क्स पर परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।

हरदीप सिंह पुरी ने इसके लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उत्तराखंड के लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत के साथ हम नई टिहरी और श्रीनगर से 6 नए रूट और 2 हेलीपोर्ट्स जोड़ने जा रहे हैं।

उड़ान के तीन चरण पहले ही पूरे कर लिए गए हैं और अभी तक 19 राज्यों तथा 2 संघ शासित क्षेत्रों में उड़ान सेवाओं में लगभग 50 लाख यात्री यात्रा कर चुके हैं। उड़ान के चौथे चरण पर अभी काम चल रहा है। यह योजना प्रधानमंत्री के विज़न को पूरा करने में और आदर्श वाक्य “सब उड़ें, सब जुड़ें” के उद्देश्य को पूरा करने में सक्षम है।