मेरान्यूज नेटवर्क.गांधीनगर: गुजरात के 35 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को आत्मनिर्भरता, कैपेसिटी बिल्डिंग और मार्केट सपोर्ट सहित अन्य क्षेत्रों में अब केंद्र सरकार के भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) का सक्रिय सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। 

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की प्रेरक उपस्थिति में मंगलवार को गांधीनगर में इस संबंध में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) गुजरात सरकार के उद्योग एवं खान विभाग तथा सिडबी के बीच हुआ।  

मुख्यमंत्री सह उद्योग एवं खान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एम.के. दास तथा सिडबी के उप प्रबंध निदेशक वसंत सत्य वेंकट राव ने इस एमओयू पर विजय रूपाणी के समक्ष हस्ताक्षर किए। 

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने हाल में जो नई उद्योग नीति-2020 जारी की है उसमें एमएसएमई सेक्टर के लिए विभिन्न प्रोत्साहन व सहायता योजनाओं की घोषणा की गई है। 

रूपाणी राज्य के व्यापार-उद्योग की रीढ़ समान एमएसएमई क्षेत्र को लगातार बढ़ावा देकर राज्य के सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्यमों को आर्थिक नजरिये से मजबूती देने को प्रतिबद्ध हैं। 

इतना ही नहीं, ऐसे एमएसएमई उद्योगों को कैपिटल सब्सिडी, ब्याज सहायता सब्सिडी, पेटेंट सहायता और टेक्नोलॉजी एक्विजेशन जैसे प्रोत्साहनों के जरिए वैश्विक बाजार की प्रतिस्पर्धा में टिकने के लिए सक्षम बनाना भी मुख्यमंत्री का ध्येय रहा है। 

इस संदर्भ में सिडबी के साथ हुए एमओयू से राज्य की एमएसएमई इकाइयों के लिए ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग के कार्यक्रमों द्वारा तकनीक हस्तांतरण और नवाचार को गति मिलेगी। सिडबी द्वारा राज्य के एमएसएमई क्लस्टर्स के लिए ढांचागत परियोजनाओं और कॉमन फैसेलिटी सेंटर की संभावनाएं तलाशने के साथ उसका मूल्यांकन भी किया जाएगा। 

भारत सरकार की सिडबी बैंक राज्य के छोटे उद्योगों को मौजूदा कोविड-19 की स्थिति से सक्षमता के साथ उबारने के लिए मददगार साबित होगी। 

यही नहीं, राज्य में एमएसएमई क्षेत्र की योजनाओं, परियोजनाओं तथा नई पहल के मुद्दों के वर्तमान ढांचे का अभ्यास कर उसकी व्यापकता एवं प्रभावकता बढ़ाने के सुझाव भी सिडबी राज्य सरकार को देगी। 

एमएसएमई इकाइयों को विश्व धारा के साथ कदम मिलाने को तैयार करने के लिए डिजिटल प्लेटफार्म मुहैया कराने में हैंड-होल्डिंग में भी सिडबी सहायक बनेगी। 

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य में अधिकतम रोजगार प्रदान करने वाली एमएसएमई इकाइयों को कोरोना की स्थिति के बाद पटरी पर लाने में यह एमओयू बहुत फलदायी साबित होगा। 

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने कोविड-19 की स्थिति में एमएसएमई क्षेत्र की मदद के लिए आत्मनिर्भर पैकेज की घोषणा कर एमएसएमई इकाइयों को 768 करोड़ रुपए की विभिन्न सहायता प्रदान कर पटरी पर लाने का संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया है। 

ऐसी एमएसएमई इकाइयों को वित्तीय मुश्किलों से निजात दिलाने भारत सरकार के आत्मनिर्भर पैकेज के तहत आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) में अब तक राज्य की 2,11,532 एमएसएमई इकाइयों को 10,56,268 लाख रुपए का ऋण मंजूर किया गया है। 

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने भी इस योजना के अंतर्गत 50 हजार रुपए तक के ऋण पकर बैंकों द्वारा ली जाने वाली स्टाम्प ड्यूटी को माफ करने का उदार अभिगम दर्शाया है। 

एमएसएमई क्षेत्र के सर्वग्राही विकास से राज्य के छोटे एवं मध्यम उद्योगों को विश्व बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सिडबी के साथ हुआ एमओयू तथा मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की ओर से एमएसएमई क्षेत्रों को दिया गया प्रोत्साहन नई चेतना देने वाला साबित होगा।