सरकार पत्रकारो को कोरोना वोरियर्स कहती है, कोरोना महामारी में पत्रकार अपनी जान की परवाह न करके लोगो के समक्ष सच्ची रिपोर्ट पेश कर रहे है. लेकिन गुजरात में न्यूज चेनल Tv9 गुजराती के पत्रकार जिज्ञेश पटेल को कोरोना महामारी की सच्ची रिपोर्ट्स पेश करना तब महंगा पड गया जब वह खुद कोरोनाग्रस्त हो गये और उनकी रिपोर्टिंग से नाराज अहमदावाद म्युनिसिपल कोर्पोरेशन संचालित SVP अस्पताल के डोक्टर्सने उन्हे उपचार के लिये भर्ती करने से ही मना कर दिया. यहां तक की अहमदावाद की मेयर बिजल पटेल और गुजरात के डिप्टी मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने भी SVP अस्पताल के डोक्टर्स को पत्रकार  जिज्ञेश पटेल को उपचार के लिये भर्ती करने को कहा फिर भी जिज्ञेश पटेल को कोरोना की ट्रिटमेन्ट देने से इनकार कर दिया. इतना ही नहीं अगर जिज्ञेश पटेल को SVP अस्पताल में भर्ती करने के लिये ज्यादा प्रेशर किया गया तो डोक्टर्सने हडताल पर उतरने की गर्भित चेतावनी दी. अहमदावाद के मेयर और गुजरात के डिप्टी मुख्यमंत्री की जिज्ञेस पटेल को SVP अस्पताल में  दाखिल कराने की कोशिश 8 घंटे तक चलती रही और यह 8 घंटे कोरोना कि सच्चि रिपोर्टस अपनी चेनल में पेश करनेवाला कोरोनाग्रस्त पत्रकार अस्पताल के बाहर इन्तजार करता रहा की कब उसे इलाज के लिये एडमिट किया जायेगा. आखिरकार खुद गुजरात के डिप्टी मुख्यमंत्री नितिन पटेल को भी SVP अस्पताल के डोक्टर्स के सामने जुकना पडा और Tv9 के पत्रकार जिज्ञेस पटेल को उन्होने अहमदावाद की प्राइवेट अस्पताल में भरती करवाना पडा, लेकिन सरकारी डोक्टर्सने कोइ ट्रिटमेन्ट नही दी. बडे दुख की बात तो यह है की देश का बडा न्यूज ग्रृप भी अपने पत्रकार की एसी हालत पर चुप्पी साधे हुए है.

इस पुरी घटना ब्योरा इस तरह है. पीछले 6 सितम्बर को न्यूज चेनल Tv9 गुजराती के पत्रकार जिज्ञेश पटेल की कोरोना रिपोर्ट पोजिटिव आइ. उन्हे कोरोना के सामान्य लक्षण होने के कारण होम आइसोलेशन में रखा गया था. जिज्ञेश पटेल कइ सालो से Tv9 गुजराती के लिये पत्रकारिता कर रहे है जिस के कारण उन्हे गुजरात के पोलिटिकल लिडर्स और स्थानिय नेता भी अच्छी तरह पहचानते है. 16 सितम्बर के दिन अहमदाबाद के महिला मेयर बिजल पटेलने जिज्ञेश पटेल को फोन कर उनके हालचाल पुछे. बातचीत के दौरान मेयर बिजल पटेल को लगा की जिज्ञेश पटेल का स्वास्थ्य अच्छा नहीं है, उन्हे अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिये. बिजल पटेलने जिज्ञेस पटेल को अहमदाबाद म्युनिसिपल कोर्रोपेशन के द्वारा संचालित SVP अस्पताल में दाखिल हो जाने के लिये कहा. 

पत्रकार होने के नाते जिज्ञेश पटेल SVP अस्पताल के सुप्रिटेन्डन्ट को पहचान ते थे. जिज्ञेश पटेलने SVP अस्पताल के सुप्रिटेन्डन्ट डॉ. मल्हान को कोल कर के उन्हे अस्पताल में भरती होने की बात कही. डॉ. मल्हान भी उन्हे भर्ती करने को राजी हो गये. लेकिन एक घंटे बाद SVP अस्पताल के सुप्रिटेन्डन्ट डॉ. मल्हानने जिज्ञेस पटेल को कोल के बताया की वो उन्हे अस्पताल भर्ती नहीं कर सकेंगे. डॉ. मल्हान की बात सुनकर जिज्ञेश पटेल के पैरो तले से मानो जमीन खिसक गइ. जिज्ञेश पटेलने जब इसकी वजह जानना चाही तो डॉ. मल्हानने इतना ही कहा की "आप मेरी मजबूरी को समजिये, में सिर्फ मुजे मिले आदेश का पालन कर रहा हूं."

कोरोना संक्रमित पत्रकार जिज्ञेश पटेलने अहमदाबाद के मेयर बिजल पटेल को फोन लगाया और बताया की SVP अस्पतालने भर्ती करने से मना कर दिया है. मेयर बिजल पटेल ने जिज्ञेश पटेल को भरोसा दिलाया की आप चिंता मत किजिए मैं अस्पताल के डोक्टर्स के साथ बात करती हुं, आप SVP अस्पताल पहुंच जाइए. जिज्ञेश पटेल 16 सितम्बर दोपहर 3 बजे एम्ब्युलेन्स में SVP अस्पताल पहुंच गये. कइ सालो से पत्रकारिता में होने के कारण अस्पताल के डोक्टर्स उन्हे पहचान ते थे, लेकिन कोइ भी डोक्टर उन्हे अटेन्ड करने को तैयार नहीं था. जिज्ञेश पटेल ने फिर एकबार मेयर बिजल पटेल को फोन लगाया. मेयर बिजल पटेल ने फीर एकबार भरोसो दिलाया की उन्हे जल्द ही ट्रिटमेन्ट के लिये भर्ती कर दिया जायेगा वे डोक्टर्स से बात कर रही है. वक्त बीत रहा था... एक घंटा होने को आया लेकिन कोइ डोक्टर्स उनके पास नहीं आ रहा था. जिज्ञेश पटेलने सीने में दर्द की शिकायत की फिर भी उन्हे देखने या भर्ती करने कोइ डोक्टर तैयार नहीं था. 

दूसरी और  मेयर बिजल पटेल SVP अस्पताल के सुप्रिटेन्टन्ड डॉ. मल्हान, डेप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर ओम प्रकाश, म्युनिसिपल कमिश्नर मुकेश कुमार को फोन लगा रहे थे ताकी जिज्ञेश पटेल को जल्द से जल्द अस्पताल में भर्ती कर सके. लेकिन ये सारी बाबु ओफसरो ने मेयर बिजल पटेल को फोन रिसिव करना बंद कर दिया क्योकी उनको पता चल गया था की मेयर उन्हे इस लिये कोल कर रहे हे ताकी जिज्ञेश पटेल को SVP अस्पताल में भर्ती करने कहेंगी. अब मेयर बडी ही मुश्कील हालात में पड गइ. दूसरी ओर जिज्ञेश पटेल अस्पताल में भर्ती होने के लिये घंटो से इन्तजार कर रहे थे. मेयर को भी दो-तीन घंटे के बाद पता चला की अब उनसे कुछ नहीं हो पायेगा. 

जिज्ञेश पटेल ने अब गुजरात के डिप्टी मुख्यमंत्री नितिन पटेल को कोल लगाया. नितिन पटेल ने दस मिनट का टाइम मांगा. लेकिन एक घंटे के बाद भी जिज्ञेश की ट्रिटमेंन्ट अस्पताल ने शुरू नहीं की. जिज्ञेश पटेल ने फिर एकबार नितिन पटेल को कोल लगाया तो नितिन पटेलने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा की अभी तक आपकी ट्रिटमेन्ट शुरू नहीं हई? नितिन पटेल ने फिर दस मिनट का वक्त मांगा. एक घंटा बित गया लेकिन जिज्ञेश पटेल को अभी भी इजाल शुरू होने का इंतजार था. जिज्ञेश पटेल ने तिसरी बार गुजरात के डिप्टी मुख्यमंत्री नितिन पटेल को कोल लगाया तो नितिन पटेल ने जवाब दिया " SVP अस्पताल के डोक्टर्स आपको ट्रिटमेन्ट देने से मना कर रहे है. अस्पताल के डोक्टर्स कह रहे है की TV9 न्यूज चेनल अस्पताल की नेगेटिव स्टोरीज चला रहा है इस लिये अगर इस चेनल के पत्रकार को इलाज के लिये अगर भर्ती किया गया तो डोक्टर्स हडताल पर चले जायेंगे."

पत्रकार जिज्ञेश पटेल को अब पता चलता है की क्यो कइ घंटो से उन्हे  SVP अस्पताल में कोरोना की ट्रिटमेन्ट के लिये भर्ती क्यो नहीं किया जा रहा. आश्चर्य की बात को यह थी कोरोनाग्रस्त होने के कारण जिज्ञेश पटेल छुट्टी पर थे और उन्होने 6 सितम्बर से 16 सितम्बर तक कोइ भी रिपोर्टिंग नहीं की. लेकिन उनकी चेनल के सहयोगी पत्रकार सचिन पाटिल ईन दिनो में अस्पतालो को ग्राउन्ड रिपोर्टिंग कर रहे थे. सचिन पाटिल कि रिपोर्ट्स से अहमदाबाद के हेल्थ डिपार्टमेन्ट का कार्यभार संभाल रहे डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर ओम प्रकाश बहुत ही नाराज थे. जिस के चलते TV9 के कोरोनाग्रस्त पत्रकार को वो कोर्पोरेशन की अस्पताल में भर्ती ही नहीं करवाना चाहते थे. 

जब जिज्ञेश पटेल ने गुजरात के डिप्टी मुख्यमंत्री नितिन पटेल को कहा की "हमारे देश में तो किसी आतंकवादी को भी मेडिकल ट्रिटमेन्ट देने का प्रावधान है तो फीर मैं तो एक पत्रकार हुं, मेरा काम सिस्टम में चल रही गलतिया दिखा के उसे सुधारना है. इस में मेरी ट्रिटमेन्ट और रिपोर्टिंग के बिच क्या संबंध है?" जवाब देते हुए नितिन पटेल ने कहा- हालत कुछ एसे है की अभी डोक्टर्स के साथ संघर्ष में उतरकर  SVP अस्पताल में कोरोना की ट्रिटमेन्ट के लिये भर्ती ठीक नहीं है. मैं आपको अहमदाबाद की किसी भी अच्छी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवा देता हुं. जिज्ञेशने नितिन पटेल से कहां की मैं एक पत्रकार नहीं बल्की एक आम नागरिक की तरह ट्रिटमेन्ट का अधिकार मांग रहा हूं, अगर मान लिजिये SVP अस्पताल में मेरे लिये बेड उपल्ध नहीं है तो फीर मुजे  SVP अस्पताल दूसरे अस्पताल में रिफर कर दे. लेकिन SVP अस्पताल के डोक्टर्स एसा करने को भी मना कर रहे है. जब की दूरसे मरीजो को ट्रिटमेन्ट दी जा रही है. 

दोपहर के 3 बजे से SVP अस्पताल में भर्ती होने आये कोरोनाग्रस्त पत्रकार जिज्ञेश पटेल को अब रात के दस बजे भी दाखिल होने के लिये इंतजार करना था. आखिरकार थकहार के जिज्ञेश पटेल ने डिप्टी मुख्यमंत्री नीतिन पटेल की बात को मान लिया और अहमदाबाद की प्राइवेट अस्पताल सिम्स में उपचार के लिये भर्ती हो गये. यह पूरे घटनक्रम में सब से बडी बात जो निकल के आ रही है यह है की, क्या एक पत्रकार को सच्ची रिपोर्ट पेश करने की यह सजा मिली है? क्या प्रजा के समक्ष ग्राउन्ड रियालिटी लाना गुनाह है? क्या सरकार भी अब इतनी मजबूर है की लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जानेवाले पत्रकारो की रक्षा करने में असमर्थ है? क्या यहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गुजरात मोडल है जिसे वो देश में लागु करना चाहते है? क्या यें वहीं वायब्रन्ट गुजरात है जिसे देश में विकास को मोडल बना के पेश किया जा रहा है?