प्रशांत दयाल, अहमदाबाद: गुजरात के लोग देश-दुनिया में अपने बिजनेस के लिये ख्यातनाम है. लोग कहते है की गुजराती जहां भी जाता है पहले बिजनेस के बारे में सोचता है. लेकिन क्या आप सोच सकते है की कोइ जेल में रहकर भी करोडो रूपये का टर्नओवर कर सके एसा बिजनेस खड़ा कर सकता है? तो इसका जवाब है हां, मौका मिले तो वो भी मुमकीन है. एसा कमाल करनेवाले एक आदमी जिनका नाम चंदुभाइ प्रजापति था. था इस लिये क्यो की उनका 26 दिसंबर 2019, गुरूवार के दिन अस्थमा की बीमारी के कारण 69 वर्ष की आयु मे मौत हुइ. आइए जानते है पुरी घटना के बारे मे.

गुजरात के अहमदावाद शहर में शाहीबाग इलाके में साबरमती जेल के कैदी एक भजिया बेच ने की दुकान चलाते है, यहां के भजिये स्वाद में इतने लाजवाब है की जो भी एकबार खाये वो दूसरी बार यहां से गुजरे तो फीर यहां से भजिया खाये बिना वापस नहीं जाता. यहां तक की कइ लोग स्पेश्यल भजिया खाने के लीये दूर-दूर से यहां आते है. इस स्टोल का सालाना टर्नओवर करोड़ों रूपये का है और इस स्टोल की शरूआत की थी हत्या के केस में सजा काट रहे चंदुभाइ प्रजापति ने.  

बात 1980 के दसक की है. गुजरात के अहमदाबाद शहर में बाबुभैया की एक गैंग थी जिस मे चुंदुभाइ प्रजापति भी शामिल थे. बाबुभैया का पुरा नाम बाबु सत्यम भैया था. जिन की एक गैंग थी. जिसे बाबुभैया गैंग के नाम से जाना जाता था. इस गैंग ने अहमदाबाद के मणिनगर एरिया में ट्रिपल मर्डर को अंजाम दिया था. इस केस में एक पुलिस इन्सपेक्टर समेत 8 लोगो को गिरफ्तार किया गया था. जिस में चंदुभाइ भी शामिल थे. चंदुभाइ गुजरात के घांगध्रा शहर के रहनेवाले थे.

साल 1983 में ट्रिपल मर्डर केस में कोर्ट ने चंदुभाइ प्रजापति समेत सभी दोषितो को 14 साल की सजा सुनाई. उनको सजा काटने के लिये अहमदाबाद की साबरमती सेन्ट्रल जेल में भेजा गया. जे में सभी कैदीओ को उनकी पसंद का काम दिया जाता है और उनके बदले तय वेतन भी मिलता है. जहां चंदुभाइ साबमरमती जेल की बैकरी में नास्ते, मिठाईयां बनाते थे. चंदुभाइ के हाथ भले ही भूतकाल में गुनाहों से रंगे थे लेकिन जेल मे आने के बाद इन हाथो में अब रसोइ का रंग एसा लगा की उनके हाथो की बनी मिठाई और नास्ते कैदी ही नहीं बल्की पुलिस अधिकारी भी बडी चांव के खाने लगे थे.

साल 1995 में गुजरात के वडोदरा शहर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. जिसमें साबरमती जेल के कैदीओ को ले जाया गया. इन कैदीओ में चंदुभाइ प्रजापति भी शामिल थे. इस कार्यक्रम में जेल के एक अघिकारी ने चंदुभाइ के पास आकर कहा चंदुभाइ... कोइ अच्छा नास्ता बनाइयें. चंदुभाइ ने गरमा-गरम भजिये बनाये. चंदुभाइ के हाथो के बने भजिये खा कर पुलिस अधिकारी को विचार आया की इतने स्वादिष्ट भजिये अगर बेचे तो लोगो को खुब पसंद आयेंगे. बस फिर क्या था साल 1997 में अहमदाबाद के सुभाषब्रिज के पास जेल के कैदीओ द्वारा एक स्टोल में भजिये बना के बेचने का शुभारंभ हुआ. यह स्टोल शुरू होने के दो दिनो में ही 70 हजार रूपये के भजिये बिक गये. थोडे ही दिनो में जेल के कैदीओ की स्टोल फेमस हो गई. चंदुभाइ ने स्वादिष्ट भजिये बनाना अन्य कैदीओ को भी शिखाया.

साल 2001 में चंदुभाइ प्रजापति की सजा खत्म हुइ. सरकार ने उन्हे कैद से मुक्त करने का आदेश दिया. जेल से बाहर आने के बाद चंदुभाइ ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर जेल के भजिये के स्टोल के सामने ही खुद का भजिया स्टोल शुरू किया. जिस का नाम उन्होंने वैभव भजिया-गाठियां सेन्टर रखा.

69 साल के चंदुभाइ प्रजापति का 28 दिंसबर 2019, गुरूवार के दिन निधन हुआ. वे अस्थमा के मरीज थे. चंदुभाइ जेल में तो गुनाह कर के आये थे लेकिन उनके प्रायश्चित और परिश्रम ने आज हजारो कैदीओ की जिंदगी बदल दी और आज उनके द्वारा शिखाये गये तरीके से भजिये बना के कैदी हजोरो लोगो को स्वादिष्ट भजिये खिलाते है... वही स्टोल पर और आज इस साबरमती जेल के कैदी के स्टोल के भजिये का सालाना कारोबार करोडो रुपये का है.

आदमी गलती करता है, लेकिन अगर वो सच्चे दिल से प्रायश्चित करे और सुधर जाये तो क्या कुछ नहीं कर सकता! चंदुभाइ प्रजापति तो आज इस दुनिया मे नहीं रहे लेकिन हजारो कैदीयो के जीवन में एक आशा की किरण और उजाला लाने का काम वो कर गये है.    

(यह प्रेरणात्मक स्टोरी के लेखक वरिष्ठ क्राईम रिपोर्टर प्रशांत दयाल है. प्रशांत दयाल मेरान्यूज डोट कॉम के वरिष्ठ संवाददाता, एवंम BBC में फ्रिलान्सर है. प्रशांत दयाल 2002 में गुजरात के कौमी दंगे, शोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस, साबरमती जेल सुरंग कांड जैसी कई बडी घटनाओ का ग्राउन्ड रिपोर्टिंग कर चुके है. संपर्क-ईमेल आईडी prashant.dayal26@gmail.com)