मेरान्यूज नेटवर्क.गांधीनगर: मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने गुजरात में सामान्य नागरिक, किसान, सरकारी या स्थानीय संस्था या सार्वजनिक ट्रस्ट या धर्म स्थानों के मालिकों की जमीन या संपत्ति को धोखे से हड़पने वाले भूमाफिया तत्वों के खिलाफ सख्ती से पेश आने का फैसला किया है। 

मुख्यमंत्री ने इसके लिये भारतीय पंजीकरण अधिनियम 1908 के कुछ प्रावधानों में सुधार कर गुजरात संशोधन विधेयक 2020 को विधानसभा में प्रस्तुत किया है, जो अगले विधानसभा सत्र में चर्चा के बाद मंजूर कर कानून बनाया जायेगा। इस नए कानून के तहत दस्तावेज पंजीकरण का कार्य सटीक, पारदर्शी और बिना किसी गलती के आसान प्रक्रिया से पूरा किया जाएगा। इस नए विधेयक के माध्यम से श्री रूपाणी ने जमीन मालिकों की संपत्ति की सुरक्षा की प्रतिबद्धता को सुनिश्चित किया है। 

वैश्विक विकास को लेकर ऊंची छलांग लगा रहा देश का अग्रणी राज्य गुजरात देश-दुनिया के निवेशकों, उद्योगों, व्यापार-रोजगार वगैरह के लिये सर्वोच्च पसंद बन गया है। मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी के नेतृत्व में गुजरात में आर्थिक, सामाजिक, व्यापारिक और कृषि की गतिविधियों में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। इन सभी गतिविधियों में वृद्धि के कारण जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने के लिये जमीन की मांग में भी लगातार वृद्धि हो रही है और इसके कारण जमीन के बजार मूल्य में भी बढ़ोतरी हुई है। 

जमीन के लेन-देन के साथ जुड़े कुछ लोग बुरी नीयत और निजी स्वार्थ का लाभ लेने के उद्देश्य से ऐसी परिस्थिति का फायदा उठाते हैं। ऐसे लोग गैर कानूनी तरीके जैसे जबरदस्ती, धमकी, ब्लैकमेलिंग या नकली दस्तावेज बनाकर जमीन हड़प लेते हैं और जमीन के स्वामित्व का गैर कानूनी हक प्राप्त कर लेते हैं। कुछ घटनाओं में यह भी देखा गया है कि ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोग कुछ प्रशासनिक कर्मचारियों से मिलीभगत कर नकल दस्तावेज बनाकर दूसरों की जमीन को हड़प कर या तो उसे बेच देते हैं या फिर उसे किराए पर दे देते हैं। राज्य सरकार को ऐसी कई शिकायतें मिली हैं जिसमें ऐसे आपराधिक तत्व किसी सामान्य नागरिक, किसान भाई या फिर धार्मिक व शैक्षणिक संस्थाओं या फिर अन्य सार्वजनिक संस्थाओं की जमीन को हड़प लेते हैं और उसे गैर कानूनी तरीके बेच देते हैं।

जमीन हड़पने से संबंधित सभी गतिविधियों पर पूर्ण लगाम लगाने और संपत्तिधारकों के हितों की रक्षा के लिए गुजरात सरकार आगे आई है। राज्य सरकार ने अब जमीन के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाते हुए इसे ऑनलाइन करने का फैसला किया है। ऑनलाइन की इस प्रक्रिया को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि सामान्य नागरिक या कोई भी संपत्तिधारक व्यक्ति या संस्था अपनी संपत्ति के दस्तावेजों को किसी वकील या दस्तावेज बनाने वालों की मदद लिए बिना स्वयं ही ऑनलाइन ड्राफ्ट कर सके और उसमें बदलाव भी वह स्वयं कर सके। इस महत्वपूर्ण कदम से संपत्तिधारकों के न केवल उस फीस की बचत होगी जो उन्हें वकील या दस्तावेज निर्माता को देनी पड़ती थी बल्कि इससे जालसाजी या नकली दस्तावेज या फिर संपत्ति के कागजों की हेरा-फेरी की संभावना भी लगभग समाप्त हो जाएगी। 

इस नए विधेयक के तहत पंजीकरण के लिए आवेदनकर्ता को इस बात का सबूत देना होगा कि वह व्यक्ति ही उस संपत्ति का मालिक है। इस प्रावधान से पावर ऑफ अटर्नी का दुरुपयोग करने वाले भूमाफियाओं पर पूर्णतः लगाम लग जाएगी। सबूत के लिए दिए जाने वाले दस्तावेजों में कृषि की जमीन के लिये 7/12 और सिटी सर्वे की जमीन के लिये प्रॉपर्टी कार्ड जैसे दस्तावेज शामिल हैं जिन्हें पंजीकरण आवेदनकर्ता को सबूत के तौर पर प्रशासन को देना होगा। 

राज्य सरकार या स्थनीय प्रशासन की संपत्ति को बेचने या किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था को ट्रांसफर करने या इसे लीज पर देने हेतु आवश्यक दस्तावेजों के लिए इस संशोधित विधेयक में स्पष्ट रूप से प्रावधान किए गए हैं। इस प्रावधान के अनुसार अधिकृत संस्था या व्यक्ति को जमीन बेचने, ट्रांसफर करने या लीज पर देने से संबंधित दस्तावेजों के पंजीकरण से पहले अधिकृत अधिकारी से अनुमति लेना जरूरी किया गया है। 

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने प्रवर्तमान भारतीय पंजीकरण अधिनियम 1908 में तीन नई कॉलम शामिल करके शिक्षा और दंड के प्रावधानों को भी अधिक व्यापक बनाया है। नए विधेयक के तहत इलेक्ट्रॉनिक साधनों से रजिस्ट्रेशन करने के लिये धोखा देने वाले व्यक्ति या पॉवर ऑफ अटर्नी का दुरुपयोग करने वाले व्यक्ति को 7 साल की कैद या संपत्ति के बाजार मूल्य के समकक्ष आर्थिक दंड या फिर दोनों सजा का प्रावधान किया गया है।  

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने राज्य के सामान्य नागरिक, किसानों, निजी या सार्वजनिक संस्था के हितों की रक्षा के लिये लैंड ग्रेबिंग प्रोहिबिशन एक्ट, जुआ-दारू-सायबर क्राईम-साहूकारी-ब्याज की गैरकानूनी वसूली-यौन उत्पीड़न-गौवंश की हत्या आदि के खिलाफ पासा कानून में संशोधन कर चुके हैं। साथ ही, गुजरात सरकार राज्य में शांति, सलामती और सुरक्षा को पूर्णतः सुनिश्चित करने के लिए गुंडों के खिलाफ अध्यादेश भी लाई है।

कानूनों में संशोधन और अध्यादेश के बाद अब रूपाणी ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए दस्तावेज पंजीकरण अधिनियम में सुधार कर इसमें धोखाधड़ी और नकली दस्तावेज की संभावना को समाप्त करते हुए सख्त सजा का प्रावधान करके पारदर्शी, भ्रष्टाचारमुक्त और संवेदनशील शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाया है।

गुजरात को उत्तम से सर्वोत्तम बनाने के लिए गुजरात सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इसके लिए यह जरूरी है कि आज के समय के भ्रष्टाचारियों, अपराधियों, असामाजिक तत्व और भूमाफियाओं पर चारों ओर से लगाम लगाया जाए। पिछले कुछ दिनों से गुजरात सरकार द्वारा लगातार आपराधिक कानूनों में संशोधन यह दिखाता है कि मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और गुजरात सरकार उत्तम से सर्वोत्तम गुजरात के निर्माण की ओर आगे बढ़ रहे हैं।