मेरान्यूज नेटवर्क.गांधीनगर: मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने गुजरात को विश्व पर्यटन मानचित्र पर और भी दमदार तरीके से चमकाने के लिए राज्य की प्राचीन धरोहरों, ऐतिहासिक विरासत इमारतों और स्थलों को हेरिटेज टूरिज्म डेस्टिनेशन (विरासत पर्यटन स्थल) के रूप में बढ़ावा देने वाली हेरिटेज टूरिज्म पॉलिसीः 2020-25 की महत्वपूर्ण घोषणा की है। 

गौरतलब है कि गुजरात रण यानी कि सफेद रेगिस्तान, समुद्र और पर्वतीय स्थलों के साथ ही प्राचीन इमारतों, धर्मस्थानकों, डायनासोर पार्क और स्टेच्यू ऑफ यूनिटी जैसी पर्यटन विविधताओं से भरपूर प्रदेश है। ऐसे में, मुख्यमंत्री ने अब इस हेरिटेज टूरिज्म पॉलिसी की घोषणा के माध्यम से इसमें विरासत पर्यटन का एक और आकर्षण जोड़ने की अभिनव पहल की है। 

‘खूश्बु गुजरात की’ सूत्र के साथ गुजरात की पर्यटन विविधता को विश्व पर्यटन के नक्शे पर अंकित करने की मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता है। 

मुख्यमंत्री ने इस नई हेरिटेज टूरिज्म पॉलिसीः 2020-25 के जरिए राज्य के छोटे गांवों और नगरों में अब तक सुषुप्त अवस्था में या कहें कि उपेक्षित रही प्राचीन विरासत इमारतों, राजा-रजवाड़ों के महलों, झरोखों, मीनारों और किलों सहित अन्य धरोहर स्थलों को दुनियाभर के पर्यटन प्रेमियों के लिए तमाम सुविधाओं और सहूलियतों के साथ खोलने का प्रेरक दृष्टिकोण अपनाया है। 

रूपाणी ने छोटे गांवों व नगरों में बरसों से अप्रयुक्त रहे राजमहलों, किलों और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को समेटे इमारतों की महत्ता को फिर से उजागर करने, लोग उसका इतिहास जान सकें साथ ही ऐसे स्थानों की समुचित देखभाल एवं संरक्षण को सुनिश्चित करने के मकसद से हेरिटेज टूरिज्म पॉलिसी में अनेक प्रोत्साहन देने का भी निर्णय किया है।  

पर्यटन क्षेत्र तथा होटल इंडस्ट्रीज को नया बल देने और छोटे गांव व नगरों में जगह के अभाव में अन्य स्थलों पर होटल, रेस्तरां और बैंक्वेट शुरू न हो सके तो ऐसी ऐतिहासिक विरासत संपत्तियों में उसे शुरू कर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी व्यापक बनाने की श्री रूपाणी की मंशा इस नई विरासत पर्यटन नीति में निहित है। 

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को गांधीनगर में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस हेरिटेज टूरिज्म पॉलिसीः 2020-25 को पर्यटन मंत्री जवाहर चावड़ा सहित वरिष्ठ सचिवों की मौजूदगी में अंतिम स्वरूप दिया। 

उन्होंने धरोहर संपत्तियों के मूल तत्व और सत्व को बरकरार रखते हुए पर्यटन आकर्षण खड़ा करने की प्रतिबद्धता के साथ इस नीति में साफ निर्देश दिए हैं कि 1 जनवरी, 1950 से पहले की ऐसी ऐतिहासिक इमारतों, महलों और किलों आदि में हेरिटेज होटल, हेरिटेज म्यूजियम, हेरिटेज बैंक्वेट हॉल या फिर हेरिटेज रेस्तरां बनाए जा सकते हैं। 

इतना ही नहीं, ऐसी हेरिटेज होटल, म्यूजियम, बैंक्वेट हॉल या रेस्तरां का निर्माण करने के दौरान हेरिटेज स्थल की ऐतिहासिक विरासत के मूल ढांचे के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। 

मुख्यमंत्री ने आजादी के बाद भारतीय संघ में विलीन हुई अनेक छोटी-बड़ी रियासतों की समृद्धि, उनके महलों के संग्रहालयों में मौजूद कीमती चीज-वस्तुएं, सौगातें, पोषाक, शस्त्र और सिक्के जैसी प्राचीन धरोहर को विश्व की वर्तमान एवं भावी पीढ़ी देख व जान सके इसके लिए हेरिटेज म्यूजियम की अवधारणा को इस विरासत पर्यटन नीति में शामिल किया है। 

उल्लेखनीय है कि गुजरात में प्रतिवर्ष लाखों की तादाद में देश और दुनिया के सैलानी पर्यटन के लिए आते हैं। मुख्यमंत्री ने अब इस विरासत पर्यटन की संकल्पना से ऐसे पर्यटकों को हेरिटेज स्थानों की यात्रा के लिए आकर्षित करने और विदेशी मुद्रा अर्जित करने के साथ ही स्थानीय रोजगार सृजन के समग्र पर्यटन विकास का दृष्टिकोण इस नीति में सुनिश्चित किया है। 

मुख्यमंत्री ने हेरिटेज टूरिज्म पॉलिसी में जिन अहम मुद्दों को शामिल किया है उसके अंतर्गत इस नीति के तहत नई शुरू की गई हेरिटेज होटल, हेरिटेज म्यूजियम, हेरिटेज बैंक्वेट हॉल और हेरिटेज रेस्तरां यूनिट तथा मौजूदा होटल और हेरिटेज म्यूजियम, बैंक्वेट हॉल और रेस्तरां यूनिट के नवीनीकरण एवं मरम्मत के लिए राज्य सरकार द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी। 

जिसके अनुसार होटल स्थापित करने के लिए 25 करोड़ रुपए तक के निवेश पर 20 फीसदी सब्सिडी यानी की अधिकतम 5 करोड़ रुपए तक की सहायता और 25 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश पर अधिकतम 10 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता राज्य सरकार देगी। 

न्यू हेरिटेज म्यूजियम, हेरिटेज बैंक्वेट हॉल और हेरिटेज रेस्तरां यूनिट तथा उसके नवीनीकरण या मरम्मत में 3 करोड़ रुपए तक के निवेश पर 15 फीसदी के हिसाब से 45 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। 3 करोड़ से अधिक के निवेश पर 15 फीसदी के हिसाब से अधिकतम 1 करोड़ रुपए की सहायता सरकार देगी। 

हेरिटेज टूरिज्म पॉलिसी की अवधि के दौरान स्वीकृत और वितरित किए गए ऋण पर पांच वर्ष के लिए 7 फीसदी ब्याज सब्सिडी प्रतिवर्ष 30 लाख रुपए की सीमा में दी जाएगी। 

मुख्यमंत्री ने हेरिटेज होटल, बैंक्वेट हॉल, म्यूजियम और रेस्तरां के लिए इस नीति के अंतर्गत कई तरह के प्रोत्साहन देने का प्रावधान भी किया है। 

जिसके अनुसार, पांच वर्ष के लिए सौ फीसदी इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी माफी और मार्केटिंग सपोर्ट के तहत राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए रेंट सहायता आदि लाभ भी मिलेगा। 

गुजरात में लोथल और धोलावीरा जैसे प्राचीन ऐतिहासिक नगरों, रानी की वाव और चांपानेर जैसे विश्व धरोहर स्थलों सहित भारत के पहले विश्व विरासत शहर अहमदाबाद की गौरवशाली विरासत है। 

रूपाणी ने इस भव्यता के साथ अब हेरिटेज टूरिज्म पॉलिसी के माध्यम से राज्य के सुदूरवर्ती छोटे गांवों व नगरों की ऐतिहासिक विरासत को, प्राचीन धरोहर एवं संस्कृति को भी दुनियाभर के पर्यटन प्रेमी देख सकें और उसका लुत्फ उठा सकें साथ ही ‘खूश्बु गुजरात की’ दुनियाभर में फैले ऐसे पर्यटन विकास के उद्देश्य से इस महत्वपूर्ण विरासत पर्यटन नीति की घोषणा की है।  

मुख्यमंत्री ने इस नीति के सुसंगत गुजरात होम स्टे पॉलिसी 2014-19 को भी ज्यादा सरल एवं पर्यटक अनुकूल बनाने का दृष्टिकोण अपनाया है। 

गुजरात का ग्रामीण जीवन, संस्कृति, इतिहास और परंपरागत धरोहर को देखने और उसका आनंद उठाने के लिए यहां आने वाले विदेश एवं भारत के अन्य राज्यों के सैलानियों को किफायती दरों पर स्वच्छ और सुविधा युक्त आवास सहूलियत इस होम स्टे पॉलिसी के अंतर्गत मिलेगी। 

यही नहीं, 1 से 6 कमरों तक के आवास और परिवार के साथ रहने वाले व्यक्ति भी होम स्टे यानी कि गृह आवास के रूप में अपना आवास पर्यटकों को उपलब्ध करा सकेंगे। ऐसे होम स्टे को घरेलू संपत्ति कर और रिहायशी बिजली दरों का लाभ मिलेगा। 

गुजरात पर्यटन निगम में पंजीकृत होम स्टे को सोलर रूफटॉप परियोजना का लाभ मुहैया कराकर सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने की रणनीति भी अपनाई गई है। 

पूरे गुजरात में लगभग 100 होम स्टे कार्यरत हैं और अब इनकी संख्या में वृद्धि होगी तथा पर्यटन निगम की ओर से होम स्टे धारकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे पर्यटकों को गुणवत्ता युक्त सेवा प्रदान कर सकें। 

मुख्यमंत्री द्वारा होम स्टे पॉलिसी को अधिक सरल बनाने से अब ग्रामीण रोजगार के साथ टूरिज्म और होटल इंडस्ट्रीज में भी व्यापक अवसरों के द्वार खुलेंगे।