मेरान्यूज नेटवर्क.गांधीनगर: मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा है कि जगत का तात सच्चे अर्थ में तात बने उस दिशा में संकल्प कर राज्य सरकार ने समयबद्ध आयोजन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि गुजरात को उत्तम से सर्वोत्तम की दिशा में आगे ले जाने के संकल्प के साथ किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर मोड़ कर हरित क्रांति के क्षेत्र में भी गुजरात देशभर में रोल मॉडल बनेगा। 

मुख्यमंत्री ने किसानों के सर्वग्राही कल्याण के लिए गुजरात सरकार की ओर से घोषित ‘सात पगला खेडूत कल्याण ना’ यानी सात कदम किसान कल्याण के योजना के दूसरे चरण में गुरुवार को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के 70वें जन्मदिन के अवसर पर देसी गाय आधारित प्राकृतिक खेती और प्राकृतिक कृषि पद्धति के जरिए जीवामृत बनाने की योजनाओं का राज्यव्यापी शुभारंभ किया। राज्य के 70 स्थानों पर आयोजित इस समारोह में गांधीनगर से राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी, उप मुख्यमंत्री नितिनभाई पटेल सहित मंत्रिमंडल के सदस्य सहभागी बने। 

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए सात कदम किसान कल्याण के योजना के अंतर्गत प्राकृतिक कृषि से जुड़ी दो योजनाओं के लोकार्पण अवसर पर कहा कि देसी गाय आधारित प्राकृतिक कृषि के जरिए जल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा होगी। उन्होंने कहा कि देसी गाय आधारित प्राकृतिक कृषि प्रोत्साहक योजना से किसानों का पुरुषार्थ पारसमणि बनकर खेतों में लहलहाएगा। 

राज्यपाल ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति के साथ जुड़ी हुई है इसलिए ही वेदों में ‘गावो विश्वस्य मातरः’ अर्थात कल्याणकारी गाय को विश्व की माता के समान माना गया है। ‘सात पगला खेडूत कल्याण ना’ योजना के तहत देसी गाय के पालन के लिए राज्य सरकार की ओर से किसानों को प्रति माह 900 रुपए की सहायता तथा प्राकृतिक कृषि के लिए देसी गाय के गोबर और गो मूत्र की मदद से बनने वाले प्राकृतिक खाद यानी जीवामृत और घन जीवामृत बनाने के लिए किसानों को 1,350 रुपए की साधन-सहायता मुहैया कराने वाली ये दो योजनाएं गुजरात के किसानों को प्राकृतिक कृषि अपनाने के लिए नया बल प्रदान करेगी।  

राज्यपाल ने हरियाणा राज्य के कुरुक्षेत्र में स्थित गुरुकुल में 200 एकड़ भूमि में की जा रही पद्मश्री सुभाष पालेकर प्रेरित प्राकृतिक कृषि के स्वानुभाव का जिक्र करते हुए कहा कि इस कृषि पद्धति से भूमि का उर्वरता बढ़ती है साथ ही जल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा होती है और देसी गाय का जतन-संवर्धन भी होता है। 

देवव्रत ने कहा कि एक देसी गाय के गोबर और गो मूत्र की मदद से 30 एकड़ जमीन में प्राकृतिक कृषि हो सकती है। इस पद्धति में कृषि लागत न्यूनतम होने से इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 में किसानों की आय दोगुनी करने का जो संकल्प लिया है, उसे साकार करने में प्राकृतिक कृषि स्वयं रासायनिक कृषि का मजबूत विकल्प साबित होगी। यही नहीं, रासायनिक कृषि के घातक प्रभाव से लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव को भी रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि के क्षेत्र में गुजरात के किसान पूरे देश को दिशा बताएंगे। 
मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने गुजरात के सपूत और देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को राज्य के साढ़े छह करोड़ नागरिकों की ओर से जन्मदिन की शुभकामनाएं और उनके दीर्घायु होने कामना व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत माता जगत जननी बने ऐसी ईश्वर उन्हें शक्ति प्रदान करे। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि संस्कृति के हितैषी और हिमायती रहे प्रधानमंत्री जब राज्य के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने किसानों को आकाशी खेती यानी वर्षा आधारित खेती को छोड़कर टपक सिंचाई, स्प्रिंकलर यानी फव्वारा सिंचाई और जैविक खेती की दिशा में प्रेरित करने को शुरू किए गए कृषि महोत्सव के चलते राज्य की कृषि विकास दर दोहरे अंकों में पहुंच गई है। 

उन्होंने जमीन की मिट्टी की गुणवत्ता की जांच कर किसान खेती करें उसके लिए सॉइल हेल्थ कार्ड और ‘लैब टू लैंड’ के दृष्टिकोण से दूरदर्शी आयोजन किया जिसके फलस्वरूप यह संभव बना है। 

रूपाणी ने कहा कि किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने में गुजरात ने अनेक नए आयाम शुरू किए हैं। ‘सात पगला खेडूत कल्याण ना’ अर्थात सात कदम किसान कल्याण के योजना के दूसरे चरण में आज ये दो कदम निश्चित रूप से अहम साबित होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य के किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए देसी गाय आधारित खेती और प्राकृतिक कृषि पद्धति के जरिए जीवामृत बनाने के लिए सहायता की यह योजना किसानों की जिंदगी में आशा की नई किरण लेकर आएगी। 

खेती सुखी तो किसान सुखी, किसान सुखी तो गांव सुखी और गांव सुखी तो देश समृद्ध की संकल्पना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अतीत की सरकारों ने कभी जितनी चिंता नहीं कि उतनी आज हम कर रहे हैं। पंडित दीनदयाल जी के मंत्र ‘हर हाथ को काम, हर खेत को पानी’ को साकार करने का हमारा संकल्प है। 

उन्होंने कहा कि किसानों को पर्याप्त पानी और बीज मिले तो पैदावार निश्चित रूप से बढ़ती ही है। पहले किसानों को 18 फीसदी ब्याज दर पर ऋण दिया जाता था, आज हम शून्य फीसदी ब्याज दर पर किसानों को कर्ज दे रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप किसानों की उपज में वृद्धि हुई है और वे आर्थिक रूप से सक्षम बने हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को सिंचाई की सुविधा मुहैया कराने के लिए गुजरात की जीवन रेखा नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर प्रोजेक्ट के निर्माण में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौर में कई विघ्न आए, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दूर किया और तब जाकर सरदार सरोवर परियोजना पूरी हुई। 700 किलोमीटर की नर्मदा नहरों के जरिए किसानों को सिंचाई की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। पिछले दो वर्ष से बांध का जल स्तर लबालब अर्थात पूर्ण स्तर पर पहुंच रहा है, यह केवल और केवल प्रधानमंत्री के संकल्प का नतीजा है। 

सौराष्ट्र में सिंचाई के लिए सौराष्ट्र नर्मदा जल अवतरण (सौनी) योजना, उत्तर गुजरात में सुजलाम सुफलाम योजना और कच्छ को नर्मदा नहर योजना के जरिए पानी पहुंचाकर किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भूतकाल में किसानों को बिजली की निर्बाध आपूर्ति नहीं होती थी, ट्रांसफार्मर जल जाते थे, जबकि हमारी सरकार ने किसानों को टिकाऊ और गुणवत्ता युक्त बिजली मुहैया कराने के लिए ज्योतिग्राम योजना कार्यान्वित कर किसानों की खड़ी फसल को बचाया है और अब 24 घंटे गुणवत्तायुक्त और निर्बाध बिजली की आपूर्ति मिलती है। 

उन्होंने कहा कि सात कदम किसान कल्याण के योजना के नवीन दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप किसान प्राकृतिक खेती की ओर मुड़कर जीरो बजट खेती करेंगे इसलिए लागत घटेगी। उन्होंने कहा कि राज्यपाल की प्रेरणा से राज्य में प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने में सफलता मिली है। जीरो बजट खेती के कारण अब किसान लाचार और बेचारा नहीं रहेगा। देसी गाय आधारित खेती करने से फसल उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में गुणवत्ता युक्त और रसायन मुक्त खेत उपज, स्वस्थ आहार, जमीन और पर्यावरण सुधार जैसे आवश्यक दृष्टिकोण के लिए प्राकृतिक कृषि एक उत्तम विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है। ऐसे में, देसी गाय के रखरखाव खर्च के लिए प्रति माह  900 रुपए की सहायता कुल 1,05,000 लाभार्थी किसानों के लिए 66.50 करोड़ रुपए का प्रावधान और देसी गाय के गोबर व गोमूत्र से जीवामृत बनाने के लिए प्राकृतिक कृषि किट के लिए 1,350 रुपए प्रति किट सहायता, कुल 1,00,000 लाभार्थी किसानों के लिए 13.50 करोड़ रुपए के प्रावधान वाली ये दो योजनाएं सात कदम किसान कल्याण के एक भाग के रूप में लागू की गई हैं। ये योजनाएं सभी किसानों को प्राकृतिक कृषि अपनाने के लिए बल प्रदान करेगी। 

कृषि राज्य मंत्री जयद्रथसिंह परमार ने स्वागत भाषण में राज्य सरकार की ओर से लागू की गई ‘सात पगला खेडूत कल्याण ना’ योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए किसानों से प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ने का अनुरोध किया। 
इस अवसर पर महानुभावों ने देसी गाय आधारित खेती करने के लिए किसानों को सहायता के चेक का प्रतीक स्वरूप वितरण किया तथा बेस्ट आत्मा अवार्ड भी प्रदान किए गए। 
कार्यक्रम में कृषि विभाग के सचिव मनीष भारद्वाज सहित कृषि विभाग के अधिकारी तथा विभिन्न जिला मुख्यालयों में पदाधिकारी और किसान जुड़े थे।