मेरा न्यूज़ नेटवर्क (गांधीनगर): मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने राज्य के तीर्थ धामों के एकीकृत उच्चस्तरीय विकास का प्रेरक सुझाव देते हुए कहा कि राज्य में आने वाले सैलानियों में से 35 फीसदी से अधिक मुख्य रूप से धर्म स्थलों की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु होते हैं। ऐसे में देशभर से आने वाले ऐसे यात्रियों के लिए तीर्थ स्थलों पर देव दर्शन के साथ पर्यटन की सुविधा उपलब्ध कराने का होलिस्टिक एप्रोच भी जरुरी है।

बुधवार को गांधीनगर में पवित्र गुजरात पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड की सर्वग्राही कार्य समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि अंबाजी, सोमनाथ, द्वारका, डाकोर, पालीताना, और पावागढ़ जैसे तीर्थ स्थानों पर जहां नियमित रूप से एक हजार से अधिक तादाद में श्रद्धालु आते हैं, वहां बोर्ड की ओर से आइकोनिक प्लेस डेवलपमेंट के लिए दीर्घकालिक आयोजन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गुजरात पर्यटन विविधताओं से भरपूर राज्य है और पर्यटन स्थलों के आसपास धार्मिक स्थान और आस्था के केंद्र भी स्थित हैं तब ऐसी यात्री सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है जिससे अधिकाधिक पर्यटक इन धार्मिक स्थलों का रुख करें।

इस संदर्भ में उदाहरण देते हुए रूपाणी ने कहा कि पर्यटक आकर्षणों को इस प्रकार निर्मित किया जाए जैसे कि धोरड़ो स्थित कच्छ के सफेद रण को देखने आने वाले पर्यटक माता ना मढ और नारायण सरोवर जैसे धार्मिक स्थानों की भी यात्रा करें। इन स्थानों की साइनेजिस और धार्मिक महत्व की जानकारी पर्यटकों को उपलब्ध करानी जरुरी है।

रूपाणी ने पुरातन सांस्कृतिक विरासत नगरी द्वारिका एवं डाकोर का वाराणसी के गंगा घाट की तर्ज पर उच्चस्तरीय विकास करने का सुझाव यात्राधाम विकास बोर्ड को दिया।

बैठक में पर्यटन सचिव श्रीमती ममता वर्मा ने यात्राधाम विकास बोर्ड के विकास कार्यों के बारें में एक प्रेजेंटेशन मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया।

प्रेजेंटेशन की जानकारी के अनुसार राज्य में सरकारी स्वामित्व वाले एवं निजी मंदिरों-तीर्थ स्थानों समेत कुल 140 धार्मिक स्थानों में 3 करोड़ 30 लाख रुपए की लागत से स्थापित किए गए सोलर रूफ टॉप प्लांट से कुल 1605 किलोवाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हुआ जिससे सालाना 1 करोड़ 15 लाख रुपए की बिजली की बचत हुई।

बैठक में यात्राधाम विकास बोर्ड की ओर से कैलाश मानसरोवर के यात्रियों को सहायता के साथ सिंधु दर्शन योजना एवं वरिष्ठ नागरिकों को राज्य के यात्राधामों की निःशुल्क यात्रा के लिए श्रवण तीर्थदर्शन योजना की भी जानकारी दी गई।

पिछले तीन सालों में 352 यात्रियों को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 80.90 लाख रुपए, सिंधु दर्शन के लिए 523 यात्रियों को 78.45 लाख रुपए की सहायता देने के अलावा 89,410 वरिष्ठ नागरिकों को श्रवणतीर्थ दर्शन योजना के तहत 5 करोड़ 29 लाख रुपए के खर्च से राज्य सरकार ने विशेष बस द्वारा तीर्थधामों की यात्रा करवाई है।

मुख्यमंत्री ने इस बैठक में अंबाजी, सोमनाथ, डाकोर, शामलाजी, पावागढ़, पालीताना और गिरनार जैसे आठ तीर्थ स्थानों में 11 लाख वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में हाई एंड क्लीनिंग, सीसीटीवी कैमरा नेटवर्क, वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुहैया कराई गई ई-रिक्शा, व्हील चेयर और रैंप जैसी सुविधाओं की भी विस्तार से समीक्षा की।

यात्राधाम विकास मंत्री दिलीप कुमार ठाकोर और राज्य मंत्री विभावरीबेन दवे सहित यात्राधाम विकास बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में उपस्थित थे।