मेरान्यूज नेटवर्क.गांधीनगर: मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने संकल्प जताया है कि नल-जल योजना के अंतर्गत आदिवासी क्षेत्रों सहित राज्य के सौ फीसदी घरों में नल से पेयजल आपूर्ति करने के मामले में गुजरात देश का नेतृत्व करेगा। 

उन्होंने कहा कि गुजरात के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के तमाम लगभग 24 लाख घरों में नल के जरिए शुद्ध पीने के पानी की आपूर्ति करने को राज्य सरकार कटिबद्ध है। आदिवासी बंधुओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से लगभग 1.25 लाख लोगों को ‘जो जोते उसकी जमीन’ के अंतर्गत जमीन का अधिकार भी दिया है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 70वें जन्मदिन के अवसर पर गुरुवार को मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी ने उकाई जलाशय आधारित 308 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुई सागबारा-देडियापाडा समूह जलापूर्ति योजना का गांधीनगर से ई-पट्टिका अनावरण के जरिए लोकार्पण किया। 

उन्होंने गौरव के साथ कहा कि प्रधानमंत्री का 70वां जन्मदिन 205 आदिवासी बहुल गांवों के 3 लाख से अधिक वनबंधुओं के लिए जल क्रांति का दिन बना है। 

मुख्यमंत्री श्र विजय रूपाणी ने प्रधानमंत्री और गुजरात के सपूत नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन के लिए साढ़े 6 करोड़ नागरिकों की ओर से शुभकामनाएं दीं। 

‘मोदी है तो मुमकिन है’ नारे को और स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि नरेन्द्रभाई मोदी एक अलग किस्म की मिट्टी से बने मनुष्य हैं। चरैवेति-चरैवेति के मंत्र के साथ प्रधानमंत्री मोदी बिना थके और बिना रुके जनता की चिंता करते हुए विकास के कार्य कर रहे हैं। उन्होंने गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही गुजरात सहित पूरी दुनिया को विकास की राजनीति का दर्शन कराया है। इससे पूर्व लिंग और जाति आधारित राजनीति का बोलबोला था जबकि उन्होंने विकास की राजनीति के जरिए विकास की नई दिशा दी है। जनता भी अब विकास की राजनीति चाहती है। इससे पूर्व तो विकास की राजनीति पर चर्चा भी नहीं होती थी। 

उन्होंने विश्वास जताया कि आज प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर भगवान उन्हें भरपूर शक्ति दे ताकि मां भारती फिर से जगत जननी बने और सभी क्षेत्रों में भारत माता की विजय पताका लहराये तथा श्री मोदी के नेतृत्व में भारत महासत्ता बने। 

रूपाणी ने कहा कि अंबाजी से उमरगाम के आदिवासी पट्टे को मुख्यधारा में शामिल करने, सर्वांगीण विकास करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की वनबंधु कल्याण योजना शुरू की है, जिसे हम आगे बढ़ा रहे हैं। 

उन्होंने मछुआरों तथा कृषि महोत्सव के जरिए किसानों के कल्याण के लिए चिंता की है। गुजरात की महिलाओं के सशक्तिकरण की भी चिंता की है। गरीबों के कल्याण के लिए गरीब कल्याण मेले शुरू किए गए हैं। 
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर विकास के पंचामृत अर्थात पांच योजनाओं-कार्यक्रमों का लोकार्पण किया गया है। 
रूपाणी ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ईश्वर से प्रार्थना की कि गुजरात सहित भारत के 130 करोड़ लोग उनके नेतृत्व में सुखी और संपन्न बने और हमें उनका मार्गदर्शन हमेशा मिलता रहे। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सागबारा और देडियापाडा क्षेत्र में पेयजल के लिए 308 करोड़ रुपए की योजना का हमने लोकार्पण किया है। 

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जो कहती है, वह करती है। हमारा यह कहना है कि ‘जिसका शिलान्यास हम करते हैं, उसका लोकार्पण भी हम ही करते हैं।’ उन्होंने कहा कि यह अभिमान नहीं बल्कि समयसीमा के भीतर कार्य पूरा होता है उसका प्रमाण है। 
कोरोना महासंकट के दौर में भी जब समूचा विश्व संघर्ष कर रहा है, तब गुजरात में 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का ई-शिलान्यास और ई-लोकार्पण कर गुजरात की विकास यात्रा को लगातार आगे बढ़ाया है। 
रूपाणी ने कहा कि कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है, एहतियात बरतते हुए उसके संक्रमण को आगे बढ़ने से रोकेंगे। लोग कम संक्रमित हों और संक्रमित हुए लोगों को त्वरित उपचार मुहैया हो और वे स्वस्थ होकर घर वापस जाएं उस दिशा में राज्य सरकार निरंतर सक्रिय है। 
इसके परिणामस्वरूप गुजरात की रिकवरी रेट यानी स्वस्थ होने की दर 84 फीसदी तक पहुंच गई है जबकि कोरोना से मृत्यु दर लगभग 2.7 फीसदी तक नीचे आ गया है। यह दर लगातार घटती जा रही है। ‘जान भी, जहान भी’ नारे के साथ गुजरात में व्यापार-रोजगार पुनः शुरू हो चुके हैं। ‘कोरोना हारेगा, गुजरात जीतेगा’ उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के गांवों में सौ फीसदी शौचालय, सौ फीसदी घरों में नल के जरिए शुद्ध पेयजल आपूर्ति करने, गुजरात को हैंडपंप मुक्त बनाने की हमारी संकल्पना है। आदिवासी क्षेत्रों में हमारी बहनों को हैंडपंप से पानी खींचने की तकलीफ से मुक्ति मिलेगी। शहरों में जिस तरह घर-घर शुद्ध पानी पहुंचता है, उसी तरह आदिवासी क्षेत्रों में भी दूर-सुदूर इलाकों में नल के जरिए शुद्ध पानी पहुंचाना है नहीं कि फ्लोराइड युक्त पानी।  

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की संकल्पना के अनुसार नल से जल योजना के अंतर्गत सौ फीसदी लोगों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने की दिशा में गुजरात आगे बढ़ रहा है। गुजरात में जलापूर्ति विभाग की ओर से गांधीनगर शहर में 24 घंटे और सातों दिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की योजना का आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करकमलों से ई-भूमिपूजन किया गया। वहीं, आज सागबारा और देडियापाडा क्षेत्र के हाशिये के लोगों के घरों में नल से पानी पहुंचाने की समूह योजना का लोकार्पण किया गया है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में हमने मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की है। आदिवासी परिवार के बच्चे भी डॉक्टर बनकर अपने क्षेत्र में लोगों की सेवा करे उस मकसद के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। शिक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए आश्रम शालाएं और एकलव्य शालाएं भी बढ़ा रहे हैं। सिकलसेल एनीमिया के मरीजों को भी विशेष उपचार मुहैया कराया जा रहा है। हमारी सरकार ने आदिवासियों के हितों की चिंता करते हुए पेसा एक्ट का अमल शुरू किया है। जंगल के खनिज और अन्य वनोपजों का मालिक आदिवासी बना रहे उस दिशा में निर्णय किए हैं। नर्मदा जिले में विश्वस्तरीय आदिवासी म्युजियम के साथ ही बिरसा मुंडा और गोविंद गुरु के इतिहास से लोगों को अवगत कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। 

समूचे आदिवासी क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए विभिन्न उद्वहन योजनाएं, पहाड़ी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लिफ्ट इरिगेशन के जरिए पानी पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाएं क्रियान्वित की हैं। जिसमें तापी जिले के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों से 30,000 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उमरपाडा और देडियापाडा में 720 करोड़ रुपए की योजना, नवसारी में वादरेज प्रोजेक्ट, सूरत में 372 करोड़ रुपए की लागत से काकरापार प्रोजेक्ट, 450 करोड़ रुपए के खर्च से करजण योजना और कडाणा से दाहोद को पानी पहुंचाने की योजना 1,120 करोड़ रुपए के खर्च से आगे बढ़ा रहे हैं। लगभग 2,900 करोड़ रुपए की लागत से 6 बड़ी योजनाएं इन आदिवासी क्षेत्रों में कार्यान्वित कर रहे हैं।  

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के लोगों को आगामी समय में घर-घर पानी उपलब्ध कराने की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समग्र क्षेत्र में 331 उद्वहन सिंचाई योजनाएं पूरी की जाएंगी। पानम जलाशय आधारित पूर्वी पट्टे के आदिवासियों के लिए भी 250 करोड़ रुपए की लागत से योजना का कार्य आगे बढ़ रहा है। अंबाजी से उमरगाम तक के क्षेत्रों में पानी होगा तो विकास होगा, इस बात को ध्यान में रखते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं। पानी होगा तो खेती और समृद्ध होगी। पानी होगा तो ही विकास बुलंदियों को छूएगा। 

इस मौके पर जलापूर्ति मंत्री श्री कुंवरजीभाई बावलिया ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर, 2016 को उनके जन्मदिन के अवसर पर दाहोद के लीमखेड़ा से समग्र आदिवासी क्षेत्र के लोगों को पेयजल और सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराने की विभिन्न योजनाएं शुरू करने की घोषणा की थी। आज मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के नेतृत्व में उन योजनाओं का ई-लोकार्पण कर रहे हैं। उन्होंने जलापूर्ति विभाग की योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी। 

गांधीनगर में जलापूर्ति विभाग के सचिव धनंजय द्विवेदी ने स्वागत भाषण दिया जबकि नर्मदा में जिला कलक्टर मनोज कोठारी ने आभार व्यक्त किया। 
इस अवसर पर सागबारा और देडियापाडा में पूर्व विधायक मोतीभाई वसावा सहित कई नेता और पदाधिकारी और अधिकारी उपस्थित थे।