मेरा न्यूज़ नेटवर्क (गांधीनगर): मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की अध्यक्षता में बुधवार को गांधीनगर में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक ने गिर, बरडा और आलेच के जंगलों में नेस क्षेत्र (जंगल के बीच कंटीली बाड़ से घिरी घास-फूस की झुग्गियां) में रहने वाले रबारी, भरवाड़ और चारण जाति के वास्तविक लाभार्थी निर्धारित करने के लिए पांच सदस्यों के आयोग का गठन करने का निर्णय किया है।

आदिजाति विकास मंत्री गणपतसिंह वसावा ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि इस आयोग में उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जिला अदालत के दो सेवानिवृत्त न्यायाधीश, वन विभाग के एक सेवानिवृत्त अधिकारी और एक सेवानिवृत्त अतिरिक्त कलक्टर सहित कुल पांच सदस्य होंगे।

वसावा ने साफ कहा कि वास्तविक आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने और किसी गलत व्यक्ति को आदिवासी के रूप में लाभ उठाने से रोकने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इस आयोग के गठन का निर्णय कर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा की प्रतिबद्धता जताई है।

उन्होंने कहा कि गिर, बरडा और आलेच के जंगल क्षेत्र में स्थित झुग्गियों में रहने वाले लोगों की अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्या को लेकर मुख्यमंत्री की मार्गदर्शन में वास्तविक आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए गत मंगलवार, ७ जुलाई को बैठक आयोजित हुई थी। आदिवासी समाज के नेताओं तथा रबारी, चारण और भरवाड़ समाज के अग्रणियों के साथ हुई इस बैठक में उनके साथ दो वरिष्ठ मंत्री भूपेन्द्रसिंह चूड़ास्मा और आर.सी. फलदु शामिल थे।

आदिजाति विकास मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने २९-१०-१९५६ की अधिसूचना से गिर, बरडा और आलेच के जंगलों के बीच फूस की झग्गियों में रहने वाले ऐसे रबारी, भरवाड़ और चारण को अनुसूचित जनजाति के तौर पर घोषित किया गया है।

इस संदर्भ में गिर, बरडा और आलेच के जंगल के बीच झुग्गियों में रहने वाले वास्तविक लाभार्थियों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। यही नहीं, आंदोलन के जरिए वास्तविक लाभार्थियों को लाभ प्रदान करने के संबंध में सरकार से मांग भी की गई है।

वसावा ने कहा कि मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इस पूरे विवाद के संबंध में राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों को आदिवासी और मालधारी समाज के अग्रणियों के साथ चर्चा-बैठक करने का मार्गदर्शन दिया था। जिसके अनुसार मंगलवार, ७ जुलाई को आयोजित हुई बैठक में अनुकूल वातावरण में चर्चाएं की गईं।

उन्होंने कहा कि वास्तविक आदिवासी लाभ से वंचित न रहे और गलत व्यक्ति लाभ न उठाए ऐसी राज्य सरकार की संकल्पबद्धता और आदिवासी, रबारी, भरवाड़ और चारण समाज के नेताओं की मांग के मद्देनजर इस आयोग के गठन का मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक ने निर्णय किया है।

आदिजाति विकास मंत्री ने साफ कहा कि इस आयोग के गठन को लेकर दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी सहमति दी है।