मुख्यमंत्री  विजय रूपाणी ने साफ कहा है कि राज्य की वन संपदा, वन और वन्य जीव सृष्टि वनबंधुओं के योगदान के कारण ही सुरक्षित रहे हैं। शनिवार को गांधीनगर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत वलसाड़ जिले के दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों कपराड़ा, धरमपुर और उमरगाम के १,१४७ वनबंधुओं को २९९ हेक्टेयर वन भूमि आवंटन के मंजूरी पत्र तथा ८,००० वनबंधुओं को अधिकार पत्र (पट्टे) का डिजिटल वितरण करते हुए उन्होंने यह बात कही। 

उन्होंने कहा कि पीढ़ी दर पीढ़ी जंगल के साथ नाता रखने वाले वनबंधुओं ने वनों का जतन किया है। बरसों से भूमि जोतने वाले ऐसे वनबंधुओं को जंगल की जमीन का मालिक बनाने के दृष्टिकोण से सरकार अब उन्हें जंगल जमीन आवंटन अधिकार दे रही है। 

आदिजाति कल्याण और वन मंत्री  गणपतसिंह वसावा ने इस अवसर पर कपराड़ा में उपस्थित रहकर प्रतीक के तौर पर ये अधिकार पत्र लाभार्थी वनबंधुओं को सौंपे। 
अंबाजी से उमरगाम की आदिवासी पट्टी के १४ जिलों में राज्य सरकार ने अब तक ९१,४०० व्यक्तिगत और ४,५६९ सामूहिक दावों को मंजूर किया है। इन दावों में १,४९,५४० एकड़ जमीन वनबंधुओं को मिली है। वहीं, सामूहिक दावों के तहत ११ लाख ६० हजार एकड़ से अधिक जमीन मंजूर की गई है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने गरीब, पीड़ित, वंचित और आदिवासियों की विशेष चिंता की है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शुरू की गई वनबंधु कल्याण योजना और पंचायत एक्सटेंशन ओवर शिड्यूल एरियाज एक्ट १९९६ (पेसा एक्ट) के अमल से वनबंधुओं के हितों की रक्षा होने से वंचित आदिवासियों को विकास के नए अवसर मिले हैं। 

उन्होंने कहा कि वन भूमि का अधिकार आदिवासी परिवारों को देने के साथ ही पेसा एक्ट के अंतर्गत गौण खनिज और लघु वनोपज के अधिकार भी वनवासियों को देकर राज्य सरकार ने स्थानीय विकास के लिए नया बल प्रदान किया है। 

 रूपाणी ने सरकार द्वारा वनवासियों के कल्याण के लिए बनाई गई अनेक योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल, कॉलेज, सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए लगभग १ लाख करोड़ की धनराशि वनबंधु कल्याण पैकेज के तहत सरकार ने आवंटित की है।  उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के बच्चों को डॉक्टरी के उच्च अभ्यास का अवसर प्रदान करने के लिए वनबंधु क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की है।  उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वव्यापी कोरोना संक्रमण के बीच भी कोरोना के खिलाफ और उसके साथ सतर्कता से जीवन व्यवस्थाएं चालू रखते हुए गुजरात कोरोना के विरुद्ध लड़ाई को जीतेगा और राज्य की विकास यात्रा न रुकेगी और न झुकेगी। 

मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज के क्रांतिकारियों बिरसा मुंडा और गोविंद गुरु के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि वनवासी समाज की भुजाओं में निहित बल को उजागर कर सरकार अंबाजी से उमरगाम की पूरी आदिवासी पट्टी में विकास के अनेक नए मील के पत्थर स्थापित कर रही है।  उन्होंने वनबंधुओं के बुनियादी कार्य को कोरोना संक्रमण के बीच भी संपन्न करने के लिए जिला प्रशासन को बधाई दी। 

आदिजाति विकास मंत्री  गणपतभाई वसावा ने कपराड़ा से अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री  विजय रूपाणी और वर्तमान सरकार के दिल में हमेशा आदिवासियों का हित समाहित है।  उन्होंने कहा कि पहले की कांग्रेस सरकार ने गुजरात के आदिवासियों को एक एकड़ भूमि का भी अधिकार तथा सड़क, पानी और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी प्रदान नहीं की और केवल वोट बैंक के रूप में आदिवासियों का इस्तेमा किया है। जबकि वर्तमान सरकार ने पानी, शिक्षा, सड़क और बिजली जैसी अनेक सुविधाएं मुहैया कराकर आदिवासी समाज को आर्थिक रूप से सक्षम आत्मनिर्भर बनाया है। 

 वसावा ने कहा कि राज्य के १४ आदिवासी बहुल जिलों और ५३ तहसीलों के ४,००० से अधिक गांवों में बसे ९० लाख से अधिक आदिवासी बंधुओं को मुख्यमंत्री  विजय रूपाणी की सरकार ने पेसा एक्ट के तहत विशेष अधिकार प्रदान किए हैं। ३५० करोड़ रुपए की लागत से राजपीपला में बिरसा मुंडा यूनिवर्सिटी की स्थापना का कार्य जारी है। आदिवासी समाज में जाति प्रमाण पत्रों को सत्यापित करने का कानून भी मुख्यमंत्री  विजय रूपाणी की सरकार ने विधानसभा में पारित कर आदिवासियों के मूल अधिकारों की रक्षा का कार्य किया है। 

वनबंधुओं को पट्टा वितरण के अवसर पर सांसद डॉ. के.सी. पटेल, विधायक सर्व भरतभाई, कनुभाई, पूर्व विधायक  जीतुभाई, माधुभाई तथा पदाधिकारी, आदिजाति विभाग के सचिव  अनुपम आनंद, जिला कलक्टर  आर.आर. रावल सहित कई लाभार्थी वनबंधु उपस्थित थे। आदिजाति विकास आयुक्त  दिलीप राणा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।