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गुजरात के गांवों को कोरोना मुक्त करने १ मई से शुरू हुए राज्यव्यापी अभियान ‘मेरा गांव, कोरोना मुक्त गांव’ को मिला ग्रामीण जनशक्ति का व्यापक समर्थन

Vijay Rupani

मेरान्यूज नेटवर्क.गांधीनगर:  मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और राज्यपाल आचार्य देवव्रत की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से गुजरात स्थापना दिवस, १ मई से गुजरात के सभी गांवों में व्यापक ग्रामीण जनभागीदारी से शुरू हुए राज्यव्यापी अभियान ‘मेरा गांव, कोरोना मुक्त गांव’ को शानदार जनसमर्थन मिला है। 

कोरोना संक्रमण की इस विकट स्थिति में गांवों में कोरोना संक्रमण न बढ़े और गांवों में रहने वाले नागरिक कोरोना से मुक्त स्वस्थ रहें उसके लिए पूरे राज्य में जनभागीदारी से एक पखवाड़े का यह अभियान शुरू किया गया है। 

इस अभियान का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने ग्रामजनों से अपने-अपने गांव में कोरोना के अति सामान्य लक्षणों वाले व्यक्तियों के लिए ग्रामीण स्तर पर कोविड केयर सेंटर शुरू कर वहां उपचार और आइसोलेशन की सुविधा के लिए हर गांव में जनभागीदारी से सामुदायिक कोविड केयर सेंटर शुरू करने का आह्वान किया था। 

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के इस आह्वान पर ‘मेरा गांव, कोरोना मुक्त गांव’ अभियान शुरू होने के मात्र ४८ घंटों यानी दो दिन में उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और राज्य की २४८ तहसीलों की १४,२४६ ग्राम पंचायतों में १० हजार से अधिक सामुदायिक कोविड केयर सेंटर कार्यरत हो गए हैं। 
राज्य के गांवों में बने इन सामुदायिक कोविड केयर सेंटरों में कुल १ लाख ५ हजार से अधिक बेड की व्यवस्थाएं की गई हैं। 

मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी गांवों में स्कूल परिसर, सामाजिक भवनों, खाली पड़े बड़े मकानों, मंडलियों और पंचायत घर जैसी जगहों में जरूरत पड़ने पर आइसोलेशन सेंटर या कोविड केयर सेंटर शुरू करने और उसमें सर्दी, खांसी और सामान्य बुखार जैसे लक्षण वाले ग्रामीणों को आइसोलेट करने की अपील की थी। 


 

 

 

 

 

यही नहीं, ऐसे आइसोलेशन सेंटर या कोविड केयर सेंटर में रहने वाले लोगों के रहने-खाने तथा विटामिन-सी, एजिथ्रोमाइसिन, पैरासिटामॉल जैसी मानक दवाइयों की व्यवस्था की जिम्मेदारी गांव के अग्रणी और युवाओं को उठाने का आह्वान भी उन्होंने किया था। 

गांवों को कोरोना मुक्त बनाने के साथ-साथ गांव में सर्दी, बुखार और खांसी जैसे सामान्य लक्षण वाले ऐसे ग्रामीण जिनके पास आइसोलेशन में रहने की सुविधा नहीं है, उन्हें ऐसे सामुदायिक कोविड केयर सेंटर में भोजन, आवास, मानक दवाइयों, आयुर्वेदिक काढ़ा तथा पल्स ऑक्सीमीटर एवं थर्मामीटर जैसी मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ आइसोलेशन में यानी अलग रखने की भी उन्होंने अपील की थी। 

इस अपील के चलते ग्रामीण स्तर पर सरकारी स्कूल, सामुदायिक हॉल, सामाजिक भवन, छात्रावास या सरकारी इमारत जैसे स्थलों का उपयोग कर जिला विकास अधिकारी के मार्गदर्शन में तहसील विकास अधिकारी और गांव के प्रमुख अग्रणियों की एक १० सदस्यीय कमेटी का गठन कर जनभागीदारी से ज्यादा से ज्यादा सामुदायिक कोविड केयर सेंटर शुरू किए जा रहे हैं। 

जिसके मुताबिक राज्य के ग्राम विकास विभाग ने ३३ जिलों और तहसील स्तर पर तंत्र वाहकों को प्रेरित कर इस अभियान के शुरू होने के महज ४८ घंटों में ही २४६ तहसीलों में १०,३२० सामुदायिक कोविड केयर सेंटर शुरू कर १ लाख ५ हजार से अधिक बेड की सुविधा जरूरतमंद ग्रामीण नागरिकों के लिए शुरू कर दी है। 

इन १०,३२० सामुदायिक कोविड केयर सेंटरों की यदि बात करें तो इसके अंतर्गत डांग जैसे दुर्गम आदिवासी क्षेत्र में १२४२ बेड की सुविधा वाले ८३ सेंटरों से लेकर उत्तर गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्र बनासकांठा में ६४०० बेड की सुविधा के साथ ८९७ सामुदायिक कोविड केयर सेंटर शुरू किए गए हैं। 


 

 

 

 

 

मुख्यमंत्री ने ऐसे सामुदायिक कोविड केयर सेंटरों में कोरोना के सामान्य लक्षणों वाले ग्रामीण नागरिकों को रहने-खाने और उपचार की सुविधा मुहैया कराकर उन्हें अन्य लोगों से अलग रखते हुए गांव में कोरोना को फैलने से रोककर ‘मेरा गांव, कोरोना मुक्त गांव’ का जो आह्वान किया है, वह बड़े पैमाने पर शुरू हो रहे ऐसे सामुदायिक कोविड केयर सेंटरों के जरिए साकार होगा। 

कोरोना की इस दूसरी लहर का सामुदायिक कोविड केयर सेंटर के माध्यम से समूचे गुजरात की ग्रामीण जनशक्ति पूरी सतर्कता और एहतियात के साथ मुकाबला कर ‘हारेगा कोरोना, जीतेगा गुजरात’ का संकल्प साकार करेगी। ‘मेरा गांव, कोरोना मुक्त गांव’ का यह अभियान ग्रामीण स्तर पर कोरोना मुक्ति का जनआंदोलन भी बनेगा। 

 

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